World Cup की टीम चुनने में राहुल द्रविड़ की मदद लेंगे चयन समिति के नए मुखिया

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नई दिल्ली. बीसीसीआई ने एक दिन पहले ही तमिलनाडु के पूर्व बल्लेबाज श्रीधरन शरत (S Sharath) को जूनियर नेशनल सेलेक्शन कमेटी का चेयरमैन (Junior National Selection Committee) बनाया था और यह जिम्मेदारी मिलने के कुछ घंटे बाद ही शरत अपने काम में जुट गए हैं और उनका पहला मिशन है अंडर-19 विश्व कप (Under-19 World Cup) के लिए टीम इंडिया का सेलेक्शन. इसके लिए वो राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) की मदद लेंगे. भारत दक्षिण अफ्रीका में हुए पिछले अंडर-19 विश्व कप में उपविजेता रहा था और राहुल द्रविड़ टीम के प्रभारी थे.

शरथ ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि मैं बेंगलोर की यात्रा करने और राहुल द्रविड़ से मिलने की योजना बना रहा हूं. वह पिछले कुछ समय से अंडर-19 टीम के साथ काम कर रहे हैं और खिलाड़ियों की प्रतिभा के बारे में अच्छे से जानते हैं. वह हमारे मार्गदर्शक होंगे. हम उनके साथ लंबी चर्चा करने और एक रोडमैप तैयार करने की योजना बना रहे हैं.

कोरोना महामारी की शुरुआत के 1 साल से अधिक समय से, देश में कोई एज ग्रुप क्रिकेट नहीं खेला गया है. पिछले कुछ महीनों के दौरान राज्यों ने खिलाड़ियों को अभ्यास शुरू करने की अनुमति दी है. ऐसे में अगले साल वेस्टइंडीज में होने वाले अंडर-19 विश्व कप की टीम चुनना आसान नहीं होगा. शरत को लगता है कि सेलेक्शन कमेटी के पास टूर्नामेंट के लिए टीम में सही खिलाड़ियों को चुनने के लिए पर्याप्त समय नहीं है. फिर, भी उनकी कोशिश होगी कि विश्व कप के लिए सर्वश्रेष्ठ टीम चुनी जाए.

हमें युवा खिलाड़ियों के साथ धैर्य दिखाना होगा: शरत
उन्होंने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण काम होगा, लेकिन हमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. हमें यह समझने की जरूरत है कि बच्चों ने एक साल से अधिक समय से क्रिकेट नहीं खेला है. दरअसल, कोविड के कारण उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. इसलिए उन्हें रीस्टार्ट बटन दबाने में समय लगेगा. चयनकर्ताओं के रूप में, हमें युवा खिलाड़ियों को वह स्थान और आजादी देने की जरूरत है, जहां वे फिर से अपने पैर जमा सकें. हमें एक समय में एक कदम उठाने और धैर्य रखने की जरूरत है.

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‘मानसिक मजबूती पर ध्यान देंगे’
विश्व कप के लिए टीम का चयन करने के लिए पहले कदम के रूप में, शरत दूसरे सेलेक्टर्स के साथ अगले हफ्ते से शुरू होने वाले वीनू मांकड ट्रॉफी के मैच देखने के लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि हम खुले दिमाग से मैच देखेंगे. कोई भी खिलाड़ी हमें चौंका सकता है. मैं व्यक्तिगत रूप से एक खिलाड़ी में जो देखना चाहता हूं, वह उनकी मानसिक मजबूती है. पहले सोच, एकाग्रता और कौशल पर ध्यान केंद्रित किया गया था. लेकिन महामारी के बाद चीजें काफी बदल गई हैं, एक खिलाड़ी को लंबे समय तक बायो-बबल में रहने की जरूरत होती है और यह युवा खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होने वाला है. इसलिए मानसिक मजबूती ही सफलता की कुंजी होगी.

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जूनियर खिलाड़ियों का पूल तैयार करने पर जोर
शरत सिर्फ अंडर-19 विश्व कप की टीम के बारे में ही नहीं सोच रहे. वो टैलेंटेड खिलाड़ियों का एक पूल तैयार करना चाहते हैं. तमिलनाडु के पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज ने कहा कि अंडर -16, अंडर -19 के अलावा हर आयु वर्ग में 30-40 खिलाड़ियों का एक पूल होना चाहिए. उन्हें इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए कि वे रणजी ट्रॉफी और अन्य प्रारूपों में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व कर सकें. यही प्रक्रिया होनी चाहिए और हमें बहुत जल्दी ज्यादा आगे के बारे में नहीं सोचना चाहिए.

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