IPL 2021: IIT या IIM में होते वेंकटेश अय्यर, जानिए फिर कैसे बने क्रिकेटर

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नई दिल्‍ली. विराट कोहली (Virat Kohli) की रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के खिलाफ अपने पहले ही आईपीएल (IPL 2021) मैच में कोहराम मचाने वाले कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के सलामी बल्‍लेबाज वेंकटेश अय्यर की जिंदगी में अगर इस खेल की जगह नहीं होती तो आज वह IIT या IIM में होते. आईपीएल 2021 के 31वें मैच में आरसीबी के दिए 93 रन के लक्ष्‍य को केकेआर ने शुभमन गिल और अय्यर की बदौलत 60 गेंद पहले ही 1 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया. वेंकटेश अय्यर (Venkatesh Iyer) ने अपने डेब्‍यू मैच में 27 गेंदों पर नाबाद 41 रन बनाए.
जीत के बाद इस खिलाड़ी ने कहा कि मैं होनहार छात्र था. आमतौर पर यह दूसरा रास्‍ता है, खासकर साउथ इंडियन परिवार है, जहां माता पिता अपने बच्‍चों को पढ़ाई पर फोकस करने के लिए कहते हैं. मेरे मामले में मेरी मां ने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया.

बाहर जाकर खेलने के लिए मां के किया प्रेरित 

मध्‍य प्रदेश के लिए घरेलू स्‍तर पर ओपनिंग करने वाले 26 साल के अय्यर ने बाकी बच्‍चों की ही तरह बल्‍ला हाथ में थामा था. क्रिकइंफो से इस खिलाड़ी ने बात करते हुए कहा कि ईमानदारी से, मैंने क्रिकेट तब खेलना शुरू किया, जब मेरी मां अक्‍सर मुझे घर के अंदर किताबों से घिरे रहने के बजाय बाहर जाकर खेलने के लिए कहती थी. अय्यर ने चार्टर्ड अकाउंटेसी के साथ बीकॉम डिग्री में भी एडमिशन लिया था. अय्यर ने 2016 में इंटरमीडिएट की परिक्षाओं में भी टॉप किया था. उस समय उन्‍हें सीए और क्रिकेट में से एक को चुनने पर फैसला लेना था, क्‍योंकि सीए फाइनल में बैठने का मतलब था कि क्रिकेट को छोड़ना या फिर कम से कम कुछ समय के लिए उससे दूर होना.

फाइनेंस में एमबीए करने का लिया फैसला 
वह पहले ही मध्‍य प्रदेश की सीनियर टीम की तरफ से टी20 और वनडे क्रिकेट में डेब्‍यू कर चुके थे और अंडर 23 के कप्‍तान भी थे. इस खिलाड़ी ने कहा कि इसके बाद मैंने सीए छोड़कर फाइनेंस में एमबीए करने का फैसला लिया. मैंने काफी एंट्रेस एग्‍जाम दिए और अच्‍छे अंक हासिल किए और एक अच्‍छे कॉलेज में एडमिशन लिया. मैं भाग्‍यशाली था कि फैकल्‍टी को क्रिकेट पसंद था और उन्‍होंने देखा कि मैं अच्‍छा खेल रहा हूं. उन्‍होंने नोट्स, उपस्थिति सहित काफी चीजों में छूट दी.

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अय्यर ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो दोनों को मैनेज करने के लिए मुझे ज्‍यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. मैं हमेशा से एक होनहार छात्र रहा हूं. मैं यही बात क्रिकेट के लिए नहीं कह सकता. अगर क्रिकेट नहीं होता तो मैं आईआईटी या आईआईएम में होता. अय्यर को 2018 में बेंगलुरु में नौकरी भी मिली थी, मगर क्रिकेट के लिए उन्‍होंने उसे छोड़ दिया था.

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