‘आखिरी गेंद फेंके जाने तक खेल खत्म नहीं होता…’, बिशन की यही बात याद कर पत्नी ने दे दी सर्जरी की इजाजत

0
46

[ad_1]

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के लीजेंडरी क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) ने 25 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन सेलिब्रेट किया. इस मौके पर उनकी किताब ‘द सरदार ऑफ स्पिन’ भी लॉन्च हुई. इस मौके पर बेदी ने परिवार, फैन्स और दोस्तों के साथ केक काटा. इस दौरान बिशन सिंह बेदी का परिवार और दोस्त उनका काफी ध्यान रखते हुए नजर आए, क्योंकि फरवरी में पूर्व क्रिकेटर की हार्ट सर्जरी हुई थी. हार्ट सर्जरी के तीन दिन बाद बेदी को ब्रेन क्लॉट की वजह से दौरा पड़ा था. इसके लिए एक जोखिम भरी सर्जरी की जरूरत थी और ऐसे में उनकी पत्नी अंजू की सहमति मांगी गई थी.

इस मौके पर उनकी पत्नी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”बिशन ऑपरेशन थिएटर में लेटे हुए थे. कुछ ऐसा कहा जो वह हमेशा कहते हैं. वह लड़कों से हमेशा कहते हैं ‘आखिरी गेंद फेंके जाने तक खेल कभी खत्म नहीं होता.’ तभी मैंने तुरंत निर्णय लिया और मैंने कहा कि सर्जरी होगी. सभी को लगा कि यह अंत है, लेकिन मैंने अपने आप से कहा कि निश्चित रूप से आपका खेल खत्म नहीं हुआ है.” सर्जरी के सात महीने बाद बिशन सिंह बेदी थोड़ा कमजोर नजर आए. उन्होंने अपने जन्मदिन पर क्रिकेट की गेंद के आकार का केक काटा.
सिर्फ भारत में है ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ रोकने का दम, 20 साल में चौथी बार तोड़ा कंगारुओं का गुरूर

जब बिशन सिंह बेदी को अस्पताल से छुट्टी मिली तो कुछ भी निश्चित नहीं था. वह अपने आसपास किसी को नहीं पहचान पा रहे थे. उन्हें फिर से चलना सीखना पड़ा. चीजें और भी मुश्किल हो गईं, जब उनका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया. लेकिन अब सब ठीक हो जाने के बाद बिशन सिंह बेदी का परिवार, दोस्ट और फैन्स उनके 75वें जन्मदिन को उनके साथ होने पर सबसे बड़ा तोहफा मानता है. बिशन सिंह बेदी की पत्नी अंजू ने बताया, ”लगभग तीन महीने तक बिस्तर पर पड़े रहना और एक शब्द भी बोलने में सक्षम नहीं होना और अब जीवन में वापस आना, न केवल मेरे लिए बल्कि डॉक्टरों सहित गंगा राम अस्पताल में सभी के लिए एक चमत्कार है. बिशन ने बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी, डॉक्टर उसके साथ खड़े रहे.”

दुनिया भर में फैले बिशन सिंह बेदी के क्रिकेट परिवार का समर्थन भी मजबूत था. अंजू का कहना है कि नियमित आने वालों में कपिल देव थे, जिन्होंने बेदी की कप्तानी में पदार्पण किया था. कपिल की पीढ़ी के खिलाड़ी अपने कप्तान की ओर देखते थे, जो उनके लिए खड़ा था और जो अपने मन की बात कहता था. अपने कप्तान को अपनी हरकतों में तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष करते देख कपिल की आंखों में आंसू आ जाते थे.

IPL: CSK vs RCB मैच को क्यों कहते हैं Southern Derby,जानिए इसके पीछे की कहानी

अंजू ने बताया, ”जब कपिल आए तो वह एक बच्चे की तरह रोए और मुझे बहुत बुरा लगा. मदन लाल, कीर्ति आजाद, मनिंदर सिंह, और गुरशरण सिंह ने दौरा किया और मेरी ताकत के स्तंभ थे. साथ ही सरहद पार लोग उन्हें प्यार करते हैं. पाकिस्तान के खिलाड़ियों से इंतिखाब आलम, मुश्ताक मोहम्मद, जहीर अब्बास, माजिद खान और सरफराज खान… ये सभी फोन पर बिशन का हाल पूछते थे.” पूर्व ऑलराउंडर कीर्ति आजाद हर हफ्ते बिशन से मिलने आते थे. उन्होंने कहा कि मैंने शुरू में जो देखा, उसमें उन्होंने सुधार किया है. मुझे यकीन है कि कुछ महीनों में वह पुराना बिशन सिंह बेदी बन जाएगा.”

कीर्ति आजाद ने कहा, ”उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे धैर्य रखें और 50 का स्कोर करने के बाद 100 तक पहुंचें. वह भी ऐसा ही करेंगे. अब वह मुझे पहचानते हैं और चीजें याद रखते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है.” जब तकरीबन 15 दिन पहले आजाद और बेदी मिले थे तो उन्होंने क्रिकेट खेला था. बेदी बगीचे में कुर्सी पर बैठे थे और बॉलिंग कर रहे थे, जबकि आजाद ने बल्लेबाजी की थी. आजाद ने कहा, ”यह बच्चों का खेल था. वह बैठे थे और बॉलिंग कर रहे थे. वहां स्टम्प्स थे और मैं बल्लेबाजी कर रहा था.”

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here