महिला टेस्ट मैच और सफेद ड्रेस: पीरियड्स के दौरान कैसे मैनेज करती हैं क्रिकेटर

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नई दिल्ली. भारत के खिलाफ इंग्लैंड के टेस्ट के दौरान लगभग आधी महिला टीम अपने पीरियड्स पर थी. जब इंग्लैंड की टैमी ब्यूमोंट ने भारत के खिलाफ टेस्ट मैच (Womens Cricket Test) के पहले दिन अपना खेल शुरू किया, तब वह बुरी तरह से डरी हुई थी. वह इस वजह से परेशान और डरी हुईं थीं, क्योंकि उन्होंने अव्यवहारिक पोशाक पहनी हुई थी- टेस्ट क्रिकेट की पारंपरिक सफेद ड्रेस. तो फिर  टॉयलेट या लेवैटरी ब्रेक (lavatory breaks) का प्रबंधन कैसे करेंगी? अगर टीवी पर उनका गीलापन लाइव लीक हो गया तो क्या होगा? सात साल में अपने पहले टेस्ट से वह आखिरी चीज थी, जिसके बारे में वह चिंतित होना चाहती थी.

टेस्ट क्रिकेट (Test Cricket) की पहचान ही है सफेद ड्रेस. महिला या पुरुष क्रिकेटर, ऐसी ड्रेस के साथ देश का प्रतिनिधित्व करना सबका सपना होता है. लेकिन इस बात का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि महिला क्रिकेटरों (Womens Cricketer) को इस सफेद ड्रेस के कारण कितना तनाव में रहना पड़ता है. इंग्लैंड की टैमी ब्यूमोंट (Tammy Beaumont) ने टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में इस वाकये को याद किया और कहा, ”मैं ओपनिंग बल्लेबाज थी. इसलिए मैंने वास्तव में अंपायर से पूछा, ‘ड्रिंक्स ब्रेक के नियम क्या हैं?”

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ब्यूमोंट के मुताबिक, ”वहां एक महिला अंपायर थी तो मैंने उनसे कहा कि पहला दिन था. फिर उन्होंने कहा कि मैं आपको समझती हूं, यह कोई समस्या नहीं है, हम इसका सामना कर सकते हैं. मैच के दूसरे दिन भारतीय बैटर में से एक को उस कारण से बाहर जाना पड़ा. मुझे लगता है कि आने वाले सप्ताह में हर कोई यह पता लगा रहा था कि उनके पीरियड्स आने वाले हैं या नहीं. हममें से बहुतों के लिए, एक टेस्ट के लिए सफेद कपड़े पहनना काफी कठिन काम था. इस पोशाक की वजह से बहुत अधिक चिंता थी.”

उस पांच दिवसीय टेस्ट के दौरान इंग्लैंड की लगभग आधी टीम अपने पीरियड्स पर थी. इंग्लैंड की ऑलराउंडर नताली शिवर के पास इस मामले में कुछ पिछला अनुभव था. 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू पर उनके पीरियड्स चल रहे थे. शिवर के लिए अंडरशॉर्ट्स अब जरूरी हैं, लेकिन इस मौके पर सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत की जरूरत थी. शिवर ने बताया कि हमारे डॉक्टर ने वास्तव में हमें रक्तस्राव कम करने के लिए कुछ दवा की पेशकश की थी.

पीरियड्स के बारे में बात करना अब भी अक्सर खेल में वर्जित माना जाता है. लेकिन इंग्लैंड की महिला क्रिकेटर खेल में महिला स्वास्थ्य देखभाल के दृष्टिकोण को बदलने के मिशन पर हैं. इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के साथ एक महिला स्वास्थ्य समूह स्थापित किया है. टैमी ब्यूमोंट के दिमाग की उपज, जिन्होंने कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान एक अहसास किया था. उन्होंने महिला एथलीट स्वास्थ्य पर शोध करते हुए इसकी शुरुआत की. उन्होंने कहा, ”मैंने अपने स्वयं के अनुभवों को देखना शुरू कर दिया, जब मुझे शायद महसूस हुआ. मैं बहुत सुस्त महसूस कर रही थी और अच्छा नहीं खेल पा रही थी.”
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उन्होंने आगे कहा, ”यदि आप मां बनना चाहती हैं, तो आप गर्भावस्था से (क्रिकेट में) कैसे वापस आती हैं? मैंने हमेशा महसूस किया कि भले ही महिलाएं ऐसा करने में सक्षम हैं, तब भी मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसा कभी नहीं करुंगी. मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं शारीरिक रूप से फिर से खेलने के लिए लायक फिट हो सकती हूं.”

एक खिलाड़ी सर्वेक्षण से पता चला कि पीरियड्स और प्रदर्शन, बोन केयर, ब्रेस्ट केयर, गर्भनिरोधक, गर्भावस्था और प्रजनन क्षमता मुख्य मुद्दे थे, जिनके बारे में खिलाड़ी अधिक जानना चाहते थे. ब्यूमोंट को उनके टेस्ट की तैयारी में मदद करने के लिए क्लॉटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं – ट्रैनेक्सैमिक एसिड और मेफेनैमिक एसिड की पेशकश की गई थी. जो रक्तस्राव की मात्रा को कम कर देता है. ये दवाइयां दर्द कम करने में भी मदद करती हैं. ये काफी कॉमन दवाएं हैं. ये कोई जादुई गोली नहीं है.

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