T20 World Cup 2021: टीम इंडिया ने गलतियों से नहीं लिया सबक तो वर्तमान कैसे बदलता?

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T20 World Cup 2021: भारतीय टीम टी20 विश्व कप में नाकाम हो रही है तो सवाल उठेंगे ही. सवाल के घेरे में कप्तान विराट कोहली, कोच रवि शास्त्री और बीसीसीआई भी आएंगे. सवाल उठेंगे कि जो आईपीएल (IPL) टी20 की सबसे बड़ी पहचान है जिसने ना जाने कितने खिलाड़ी दुनिया भर को दिए हैं, वो भारत को एक चैंपियन टीम देने में नाकाम क्यों हो रहा है?

Source: News18Hindi
Last updated on: November 1, 2021, 12:44 PM IST

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यह सच है कि अब भी टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप में वापसी कर सकती है. अपने बचे हुए तीनों मैचों में अफगानिस्तान, नामीबिया और स्कॉटलैंड को 70 रन से ज़्यादा के अंतर से हराना और फिर ये उम्मीद करना कि अफगान टीम न्यूज़ीलैंड को पटकनी दे. यह असंभव तो नहीं है लेकिन आसानी से मुमकिन भी नहीं. दरअसल, टीम इंडिया के पास टूर्नामेंट में अपनी राह तय करने का मौका पहले दो मैचों में था जिसे उसने बेहद आसानी से लुटा दिया.

कप्तान ने पहले भांप ली थी नाकामी?

हार के लिए पारंपरिक तौर पर हमेशा कप्तान को निशाना बनाया जाता है. विराट कोहली का यह बतौर कप्तान आखिरी टूर्नामेंट है और शायद उन्होंने पहले ही भांप लिया था कि एक और नाकामी उनका ताज छीन ले और इसलिए उन्होंने टूर्नामेंट से पहले ही अपना पद त्यागने का ऐलान कर दिया. अब सवाल ये उठता है कि इतन अहम टूर्नामेंट से ठीक पहले कोहली का ये फैसला टीम हित में सही था? अब चूंकि टीम हार रही है तो इसके मायने बदलेंगे. ऐसी बातें होंगी कि टीम पर कोहली का पूरा नियंत्रण नहीं रहा था. ये बात तो सही है कि बोर्ड में बदले समीकरण के चलते कोहली इतने ताकतवर नहीं रहे हैं ले. अपने आखिरी टूर्नामेंट में कोहली बिलकुल हताश और निराश दिखे जिसका असर उनकी टीम के खेल पर देखने को मिला. कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाज़ के तौर पर भी कोहली संघर्ष करते दिख रहे हैं और इसका खामियाजा भी टीम को भुगतना पड़ा है.

कोच ने जरूरत से ज़्यादा कामयाबी हासिल कर ली?

कोच रवि शास्त्री के बारे में क्या कहा जाए. शास्त्री ने तो टूर्नामेंट से पहले ही इंग्लैंड की अखबार द गार्डियन को एक इंटरव्यू में कहा कि बतौर कोच उन्होंने ज़रुरत से ज़्यादा कामयाबी हासिल कर ली. शास्त्री कोच के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो टेस्ट सीरीज़ का हवाला दे रहे थे. वो भूल गए कि करीब आधे दशक तक टीम इंडिया के साथ जुड़े रहने पर ना तो वनडे क्रिकेट और ना ही टी20 में टीम इंडिया कोई आईसीसी खिताब जीत पाई. और तो और आईपीएल के दौरान कोच रणनीति बनाने की बजाए एक वेबसाइट के लिए एक्सपर्ट की भूमिका निभा रहे थे. आम-तौर पर बीसीसीआई अपने कोच को ऐसा करने की अनुमति नहीं देता है लेकिन शास्त्री ने शायद अपने आखिरी टूर्नामेंट में बोर्ड की तनिक परवाह भी नहीं की.

आननफानन में मेंटोर धोनी को जोड़ना फ्लॉप

इसके बाद बात आती है टीम मैनेजमेंट की, जिसमें सबसे ज़्यादा ताकत कप्तान और कोच के पास रहती है. इस टीम के साथ जब मेंटोर के तौर पर महेंद्र सिंह धोनी भी जुड़ गए तो उम्मीदें भी बढ़ गईं. धोनी को भी अहसास शायद हो गया होगा कि चेन्नई सुपर किंग्स के लिए जो उनको फैसले लेने में आज़ादी मिलती है वैसा सिर्फ दो हफ्ते के अंदर टीम इंडिया के साथ नहीं हो सकता है.

भारतीय सेलेक्टर्स भी कटघरे में आएंगेटीम मैनेजमेंट के साथ भारतीय सेलेक्टर्स भी कटघरे में निश्चित तौर पर आएंगे. आखिर हार्दिक पंड्या को ऑलराउंडर के तौर पर चुनने की ज़िद ने ही टीम की नैया डुबोने में अहम भूमिका निभाई है. चेतन शर्मा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने भी शायद  कोहली और शास्त्री के अडियल रवैये के आगे लगता है कि हथियार डाल दिए और अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर इस बड़े नुकसान के लिए भारतीय चयनकर्ता भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं.

सवालों के घेरों में तो आईपीएल भी

आईपीएल तो पूरी बहस में सबसे बड़ा हाथी है जो सवालों के घेरों में तो ना चाहते हुए भी आएगा ही. ये सवाल उठेंगे कि जो टूर्नामेंट टी20 की सबसे बड़ी पहचान है जिसने ना जाने कितने खिलाड़ी दुनिया भर को दिए हैं, वो भारत को एक चैंपियन टीम देने में नाकाम क्यों हो रहा है? आईपीएल की थकान और दबाव वाले क्षण भारतीय खिलाड़ियों पर सबसे ज़्यादा असर डालते हैं क्योंकि देश के खिलाड़ी हर मैच में खेलते हैं और हार-जीत के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार उन्हें ही ठहराया जाता है. आईपीएल और टी20 वर्ल्ड कप के बीच आयोजन में कम से कम कुछ महीनों का अंतर रखना शायद ज़रुरी हो गया है क्योंकि अगर आप इतिहास पर नज़र दौड़ाएं तो 2014 और 2016 में टीम इंडिया फाइनल और सेमी फाइनल में पहुंची थी जबकि 2009, 2010 और अब 2021 में भी जब आईपीएल के ठीक बाद वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ तो टीम इंडिया थकान की शिकार होती दिख रही है.

बोर्ड पर भी सवाल होने लाजिमी है

खिलाड़ियों के साथ-साथ बोर्ड पर भी सवाल होने लाजिमी है. आखिरकार, बीसीसीआई पिछले 15 सालों से आखिरकार अब तक ये बात क्यों समझने में नाकाम रही है कि टी20 में पावरहाउस बनने के लिए उसे आईपीएल की चकाचौंध से निकलना होगा. टी20 भले ही टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट की तरह गेंद और बल्ले के बीच का मुकाबला देखने में लगे लेकिन ये एक अलग खेल है. और इसलिए कामयाब टीमें क्रांतिकारी सोच रखने वाले चयनकर्ता, बेहद आधुनिक समझ रखने वाले कोच और स्पोर्ट स्टाफ को अपनी टीम में अहमियत देने लगे हैं. कोहली, रोहित, राहुल और पंत निश्चित तौर पर लाजवाब खिलाड़ी हैं टेस्ट और वनडे में लेकिन क्या यही बात इतने ठोस तर्क से साथ टी20 फॉर्मेट में उनके बारे में कही जा सकती है? शायद नहीं. इसके लिए आपको इन खिलाड़ियों के टी20 फॉर्मेट में स्ट्राइक रेट पर जाना होगा. सिर्फ दूसरे फॉर्मेट में शानदार साख के चलते टॉप खिलाड़ियों के खेल को टी20 फॉर्मेट में अलग चश्मे से नहीं देखने की भूल तो बीसीसीआई भी लंबे समय से कर ही रहा है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)


ब्लॉगर के बारे में

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: November 1, 2021, 12:44 PM IST



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