ऋषभ पंत, शिखर धवन के ‘उस्ताद जी’ का पहला और आखिरी प्‍यार था क्रिकेट, नहीं की कभी शादी

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नई दिल्ली. भारत को एक-दो नहीं एक दर्जन से अधिक नामचीन क्रिकेट खिलाड़ी देने वाले कोच तारक सिन्हा का निधन ( Coach Tarak Sinha Death) हो गया. वो लंबे वक्त से कैंसर से जूझ रहे थे. वो जिंदगी की आखिरी सांस तक सिर्फ क्रिकेट के बारे में ही सोचते रहे. इसलिए ऋषभ पंत (Rishabh Pant), शिखर धवन (Shikhar Dhawan) और आशीष नेहरा (Ashish Nehra) जैसे भारतीय क्रिकेट के सितारी खिलाड़ियों को तराशने वाले ने तारक सिन्हा ने कभी शादी नहीं की. उनका पहला और आखिरी प्यार क्रिकेट ही रहा. वो अपने पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में परचम बुलंद करने वाले शिष्यों की लंबी फौज छोड़कर गए हैं. वो दिल्ली में सोनेट क्रिकेट क्लब (Sonnet Cricket Club) चलाते थे. इसमें क्रिकेट का ककहरा सीखने वाले स्टार से लेकर युवा खिलाड़ियों तक के लिए वो ‘उस्ताद जी’ थे. जिस तरह मुंबई क्रिकेट में रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) की पहचान एक कोच के तौर पर थी. ठीक वैसा ही, रूतबा तारक सिन्हा का दिल्ली में था.

तारक के तराशे क्रिकेट खिलाड़ियों ने ना सिर्फ घरेलू, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी अपनी पहचान बुलंद की. आप नाम गिनते-गिनते थक जाएंगे. लेकिन खिलाड़ियों की फेहरिस्त कम नहीं होगी. उन्होंने करीब 5 दशक जमीनी स्तर पर क्रिकेट खिलाड़ियों को तैयार करने का काम किया. शुरुआती दौर में उन्होंने दिल्ली क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार रहे सुरिंदर खन्ना, मनोज प्रभाकर, रमन लांबा, अजय शर्मा, अतुल वासन और संजीव शर्मा जैसे खिलाड़ियों को तराशा. जो भारत के लिए भी खेले. वहीं, 1980 से 1990 के दशक में घरेलू क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों में शामिल केपी भास्कर भी तारक सिन्हा की एकेडमी से ही निकले थे. भास्कर ने 95 फर्स्ट क्लास मैच में 52 से ज्यादा के औसत से 5443 रन बनाए थे.

बीसीसीआई ने तारक सिन्हा का बेहतर इस्तेमाल नहीं किया
1990 के दशक के बाद का वह समय था, जब उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को कई शानदार खिलाड़ी दिए. इसमें आकाश चोपड़ा, महिला क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा, ऑलराउंडर रुमेली धर के साथ तेज गेंदबाज आशीष नेहरा, शिखर धवन शामिल थे. इसके बाद उनकी एकेडमी से ऋषभ पंत निकले, जिसने बेहद कम उम्र में अपनी बेखौफ बल्लेबाजी के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अलग पहचान बनाई. हालांकि, खेल की गहरी समझ और खिलाड़ियों को तराशने का बेहतरीन हुनर होने के बावजूद बीसीसीआई ने कभी तराक सिन्हा का बेहतर इस्तेमाल नहीं किया. उन्हें एक बार महिला क्रिकेट टीम का कोच बनाया गया था. तब उन्होंने मिताली राज, झूलन गोस्वामी जैसे खिलाडि़यों के साथ काम किया था.

तारक सिन्हा ने क्रिकेट के कारण शादी नहीं की
तारक सिन्हा के लिए सोनेट क्लब परिवार जैसा था. वो क्रिकेट के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने कभी शादी के बारे में सोचा तक नहीं. वो हमेशा ऐसे खिलाड़ियों की तलाश में रहते थे, जिन्हें भारतीय क्रिकेट के नए सितारे के तौर पर तराशा जा सके. वो जितना क्रिकेट से प्यार करते थे, उतना ही ध्यान अपने क्लब में आने वाले बच्चों की पढ़ाई पर भी देते थे. इसलिए स्कूल और कॉलेज की परीक्षा के वक्त अगर कोई स्टूडेंट क्रिकेट कोचिंग के लिए आता था, जो उसे वापस भेज देते थे और पेपर खत्म होने के बाद दोबारा आने को कहते थे. क्योंकि उन्हें पता था कि हर बच्चा धवन, पंत या आशीष नेहरा नहीं बन सकता. इसलिए उसके पास प्लान-बी होना जरूरी है.

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पंत से था कोच तारक सिन्हा का खास रिश्ता
ऋषभ पंत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आज अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. उन्हें भी क्रिकेट का ककहरा तारक सिन्हा ने ही सिखाया था. ऋषभ रुड़की से दिल्ली अपनी मां के साथ ट्रेनिंग के लिए आते थे. उसी दौरान तारक ने अपने असिस्टेंट से ऋषभ के खेल पर नजर रखने के लिए कहा था. पंत के टैलेंट को भांपकर तारक ने ही उन्हें दिल्ली के स्कूल में एडमिशन दिलाया और उनके रहने और खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम किया. ताकि पंत अपना पूरा ध्यान क्रिकेट पर लगा सकें. एक इंटरव्यू में पंत ने अपनी जिंदगी में कोच तारक सिन्हा की अहमियत बताई थी. तब पंत ने कहा था तारक सर मेरे लिए पिता जैसे नहीं, बल्कि पिता ही हैं. पंत ने इतने कम वक्त में जो बुलंदी हासिल की. उससे तारक भी काफी खुश थे.

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तारक सख्त मिजाज कोच थे. गलती होने पर अपने क्लब के किसी भी बच्चे को फटकार लगाने से भी गुरेज नहीं करते थे. लेकिन फिर वो भी अपने शिष्यों के चहेते थे और आज नम आंखों से सभी ‘उस्ताद जी’ को अंतिम विदाई दे रहे हैं.

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