Team India में सलेक्शन के बाद क्या बोले आवेश खान और वेंकटेश अय्यर, युवाओं को दी ये सलाह

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इंदौर. टीम इंडिया (Team India) में सलेक्ट होने के बाद क्रिकेटर वेंकटेश अय्यर (Cricketer Venkatesh Iyer) और आवेश खान अपने घर इंदौर पहुंच गए हैं. यहां दोनों का भव्य स्वागत किया गया. दोनों के घर में हर तरफ खुशी और उल्लास का माहौल है. अपने स्वागत से भावुक हुए वेंकटेश  और आवेश ने कहा उनका फिलहाल अब एक ही सपना है-इंडिया को वर्ल्ड कप जिताना है. इसके लिए वो पूरे जी जान से जुट जाएंगे और आने वाला हर टूर्नामेंट भारत जीते इसकी कोशिश करेंगे.

देश के सबसे साफ शहर इंदौर के तिलक नगर में रहने वाले क्रिकेटर वेंकटेश अय्यर और आवेश खान जब अपने गृह नगर पहुंचे तो लोगों ने उनका गर्म जोशी से स्वागत किया. गली क्रिकेट से टीम इंडिया तक का उनका सफर रोमांच और सफलता का है.

नाम करूंगा रौशन
इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल किए गए आवेश खान के घर जश्न का माहौल है. उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए शुभचिंतक, दोस्त और परिचित ढोल नगाड़ों के साथ बधाई और शुभकामना देने पहुंचे. क्रिकेट प्रेमियों ने फूल मालाएं पहनाकर और मिठाई बांटकर खुशियां मनायीं. आवेश खान ने न्यूज़ 18 से बातचीत में कहा इंदौर के साथ इंडिया का नाम रौशन करूंगा. मैं135 करोड़ भारतीयों की आशाओं पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है. माता पिता कहते हैं कि जुनून ने ही आवेश को ये सफलता दी. मां हंस कर कहती हैं मैं तो इसे खेलने से मना करती थी. कहती थी कि खेल छोड़ो पढ़ाई पर ध्यान दो.

गली में पले बड़े सपने
टीम इंडिया में सलेक्शन के बाद यहां आकर वेंकटेश अय्यर ने कहा गली क्रिकेट से ही उनके करियर की शुरुआत हुई थी. यहीं खेल कर ही उन्हें एहसास हुआ था कि वो प्रोफेशनल क्रिकेट खेल सकते हैं. गली क्रिकेट की हर क्रिकेटर के जीवन में एक अहम भूमिका होती है. इन्हीं गलियों में खेलकर वो देश के लिए खेलने का सपना देखता है. मेरा सपना भी यहीं से साकार हुआ है.

पढ़ाई और खेल का सफर
वेंकटेश बताते हैं कि मैंने इंटर तक पढ़ाई की है. उसके बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट की तैयारी की थी. लेकिन उसी दौरान मेरा रणजी ट्रॉफी डेब्यू हो गया था. इसलिए पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था. उसके बाद मैंने एमबीए किया, क्योंकि मैं एक साउथ इंडियन फैमिली से हूं इसलिए पढ़ाई का काफी प्रेशर था. लेकिन मैंने कभी भी ये लगने नहीं दिया कि पढ़ाई मेरे लिए सेकेंडरी है.

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दादा सौरव गांगुली की सलाह
वो कहते हैं मुझे बचपन से ही सौरव गांगुली बहुत पसंद हैं. उनकी बैटिंग हो चाहें बॉलिंग हो. उनका हर एक स्टाइल मैं कॉपी करने की कोशिश करता रहा और दादा ने इनडायरेक्ट रूप से मेरे करियर में बहुत हेल्प की है. उन्हें देख देख कर मैंने क्रिकेट खेलना स्टार्ट किया और मैं हमेशा ये कोशिश करता रहा कि उनके जैसा बनूं.अभी हाल ही में मेरी उनसे मुलाकात भी हुई. दादा ने कहा और मेहनत करते रहो. अपने शरीर का ध्यान रखो.

नये खिलाड़ियों को सलाह
वेंकटेश अय्यर कहते हैं मैं तो उभरते खिलाड़ियों से यही कहूंगा कि मेहनत से पीछे न हटें. जिस तरह हर डोमेस्टिक खेल में खिलाड़ी मेहनत करता है. सुबह क्लब जाना, बैटिंग और बॉलिंग पर वर्क करना, अपनी फील्डिंग पर वर्क करना और खासतौर पर अपने शरीर का ख्याल रखना जरूरी है. क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें शरीर को बहुत मेहनत और प्रयास की जरूरत होती है. इसमें फिजिकल ट्रेनिंग बहुत इंपॉर्टेंट होती है. मैं भी अपनी फिटनेस का काफी ध्यान रखता हूं.

I love Indore
वेंकटेश अय्यर अपने शहर इंदौर के फैन हैं. वो कहते मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मैं इंदौर में जन्मा क्योंकि इंदौर स्वच्छता से लेकर दूसरे कई मामलों में नंबर वन है. यहां क्रिकेट की सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. मुझे अच्छा लगता है जब मैं बताता हूं कि मैं देश के सबसे स्वच्छ शहर से हूं. अब मेरा मकसद इंदौर के साथ देश का गौरव बढ़ाने का है. टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताना मेरा लक्ष्य है.

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