क्या टीम इंडिया के चयन में कप्तान का रोल नहीं होता? क्या हैं नियम और क्या होती है हकीकत

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नई दिल्ली. रवि शास्त्री (Ravi Shastri) का बतौर कोच कार्यकाल अब खत्म हो चुका है. टीम इंडिया (Team India) ने शास्त्री के समय विदेशों में टेस्ट और लिमिटेड ओवर सीरीज में अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन वे आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत सके. विराट कोहली (Virat Kohli) और शास्त्री की जोड़ी हिट रही. इस बीच शास्त्री का एक बयान काफी चर्चा में है. उन्होंने कहा कि सेलेक्टर्स ही 15 खिलाड़ी चुनते हैं, कप्तान के पास कोई अधिकार नहीं होता. हाल ही में न्यूजीलैंड सीरीज (India vs New Zealand) के लिए टीम चुनी गई है. सीरीज 17 नवंबर से शुरू हो रही है. क्या शास्त्री की बात सही है, क्या रहा है टीम इंडिया का इतिहास. आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

रवि शास्त्री के बयान को नियम के हिसाब से देखें तो इसे सही माना जा सकता है. टीम कप्तान नहीं बल्कि बीसीसीआई (BCCI) की ओर से नामित किए गए सेलेक्टर्स ही चुनते हैं. लेकिन ये भी बात सही है कि 15 सदस्यीय टीम में किन खिलाड़ियों को जगह दी जाए, इसमें कप्तान के हित और मैनेजमेंट को भी ध्यान में रखा जाता है. सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) दिग्गज खिलाड़ी होने के साथ-साथ टीम इंडिया के कप्तान भी रह चुके हैं. 1981 में न्यूजीलैंड दौरे पर दिलीप दोषी के चोटिल होने के बाद रवि शास्त्री को टीम में जगह मिली थी. तब गावस्कर ने ही उन्हें टीम में शामिल किए जाने की हिमायत की थी.

अजहरुद्दीन और राजू की जोड़ी हिट रही

पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin) ने टीम इंडिया को कई सफलता दिलाई. उनके समय में बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज वेंकटपति राजू का टीम में होना जरूरी होता था. अब बात करें पूर्व दिग्गज और कप्तान रहे सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) की तो एक बार टीम में विनोद कांबली सहित कई खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं मिली थी. तब उन्होंने इसे बी टीम तक कह दिया था.

गांगुली तो खिलाड़ियों के साथ खड़े दिखे

सौरव गांगुली (Sourav ganguly) ने बतौर कप्तान कई खिलाड़ियों को लंबे समय तक टीम में रखा. बात चाहे मोहम्मद कैफ की हो या हरभजन सिंह की. वीरेंद्र सहवाग हों या युवराज सिंह. एमएस धोनी की बात करें तो उनकी कप्तानी में रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, सुरेश रैना को टीम में जगह मिली. लेकिन जब विराट कोहली कप्तान बने तो आर अश्विन, कुलदीप को लेकर उनका रवैया वैसा नहीं रहा. उनके बारे में कहा जाता है वे खिलाड़ियों को अधिक मौके नहीं देते हैं और जल्दी-जल्दी बदलाव करते हैं. लेकिन बात चहल की हो या मोहम्मद सिराज की. वह कोहली की पसंद रहे.

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अंबाती रायडू तो आपको याद ही होंगे. 2019 वर्ल्ड कप के पहले तक वे टीम इंडिया में नंबर-4 पर लगातार खेल रहे थे. लेकिन वर्ल्ड कप के लिए चुनी टीम गई टीम से वे बाहर थे. इन सब उदाहरणों से साफ है कि सेलेक्टर्स हमेशा कप्तान की मर्जी का ध्यान रखते हैं. भले ही वे सीधे तौर पर टीम चयन में शामिल ना होते हों.

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