Interview: ऋषभ पंत स्टडी टाइम में कमरा बंद कर बहन के साथ बिंगो खेलते थे, फिर पड़ती थी जोरदार डांट

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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की की है. रुकड़ी से दिल्ली और फिर नेशनल क्रिकेट टीम का सफर ऋषभ के लिए कभी आसान नहीं रहा था, लेकिन उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया. ऋषभ पंत की बहन साक्षी पंत (Sakshi Pant) ने भी अपने भाई की तरह अपनी फिटनेस को लेकर एक अलग ही तरह का जुनून दिखाया है. साक्षी ने अपने भाई ऋषभ की मदद से महज 10 महीने में 25 किलो वजन कम करके दिखाया. ऋषभ और साक्षी का रिश्ता भाई-बहन के साथ दोस्त का भी है, जो हर कदम, हर मुश्किल और हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ देते हैं. साक्षी ने न्यूज18 हिंदी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ना केवल अपनी वेट लॉस जर्नी के बारे में बताया है, बल्कि ऋषभ की शरारतों से लेकर उनके लगातार परिपक्व होने के सफर के बारे में भी बात की है.

सवाल: आप ऋषभ पंत से छोटी हैं या बड़ी? और आपका उनसे साथ किस तरह का रिश्ता है?

जवाब: ऋषभ पंत मेरा छोटा भाई है. वो मुझसे तीन साल छोटा है. हमारा रिश्ता एक दोस्त जैसा है, लेकिन वह बचपन से ही मेरी केयर एक छोटी बहन की तरह करता है. वो मुझे इतने प्यार और दुलार से ट्रीट करता है कि लोगों को लगता है कि मैं उनकी छोटी बहन हूं, लेकिन मैं ऋषभ की बड़ी बहन हूं.

सवाल: आपकी वेट लॉस जर्नी काफी इंस्पायरिंग रही है. किस तरह इसकी शुरुआत हुई और ऋषभ पंत का इसमें कितना प्रभाव रहा?

जवाब: मेरी वेट लॉस जर्नी में सबसे बड़ा हाथ ऋषभ पंत का ही है. उन्होंने ही मुझे मोटिवेट किया वेट लॉस और खुद को फिट रखने के लिए. मैंने अपना 81 किलो से 56 किलो किया है. मैंने 10 महीने में लगभग 25 किलोग्राम वजन घटाया है और यह सब ऋषभ की वजह से ही हो पाया है. ऋषभ ने मुझे बोला था कि मैं कर सकती हूं और वह इस जर्नी में हर पल मेरे साथ रहेगा. मैं जब भी अपने वजन या वेट लॉस जर्नी को लेकर हतोत्साहित होती थी तो वह मुझे समझाता कि अगर मैं लगातार कोशिश करती रहूंगी तो पक्का हो जाएगा. उन्होंने मुझे कहा कि मैं बस कोशिश करती रहूं और पता भी नहीं चलेगा कि कैसे सब हो गया. और यही हुआ मुझे कुछ वक्त बाद यह अच्छा लगने लगा. इस तरह मैं फैट टू फिट हो गई. इस सबका क्रेडिट मेरे भाई और मम्मी को जाता है, जो हर चीज में, हर वक्त मेरे साथ खड़े रहे.

सवाल: ऋषभ पंत के साथ अपने बचपन का कोई मजेदार और यादगार किस्सा बताइए?

जवाब: हमारे बचपन के कई मजेदार किस्से हैं. हम दोनों को पढ़ाई के लिए रोज रात को एक कमरे में 2 घंटे के लिए बिठाया जाता था और बोला जाता था कि 2 घंटे बाद आप दोनों से पूछा जाएगा कि आप लोगों ने क्या पढ़ाई की है. लेकिन कमरे का दरवाजा बंद होने के बाद हम बॉल से कैच-कैच खेलने लगते थे या अपनी कॉपी में बिंगो गेम खेलते थे. 2 घंटे बाद जब मम्मी-पापा आकर पूछते थे कि क्या पढ़ा तो हमें कुछ नहीं आता था और फिर जो हमारी डांट पड़ती थी.

सवाल: ऋषभ पंत का झुकाव क्रिकेट की तरफ कैसे हुआ?

जवाब: ऋषभ पंत बचपन से ही क्रिकेट खेलते थे और ये शौक उन्हें हमारे पापा से लगा था. हमारे पापा खुद भी क्रिकेट खेलते थे. पापा भी ऋषभ की तरह विकेटकीपर थे. उनका हमेशा से यही सपना था कि मैं नहीं बना, लेकिन मेरा बेटा क्रिकेटर बनेगा. इसके साथ ही ऋषभ का खुद भी क्रिकेट में मन लगता चला गया और उसने पापा का सपना पूरा किया. यह उनका खुद का भी सपना है. ऋषभ 12-13 साल का रहा होगा, जब टेलीविजन पर एक मैच देखते हुए पापा ने कहा था कि एक दिन मेरा बेटा यहां होगा.

सवाल: अपने फैमिली बैकग्राउंड के बारे में बताइए? किस तरह आपने और परिवार के बाकी लोगों ने ऋषभ को सपोर्ट किया?

जवाब: हमारे मम्मी-पापा का रुड़की में एक छोटा सा स्कूल है. आज भी वो स्कूल मेरी मम्मी चला रही हैं. उस स्कूल को अब गरीब बच्चों के लिए चलाया जा रहा है. ऋषभ को बचपन से ही कभी भी क्रिकेट खेलने के लिए नहीं रोका गया. सबकी प्राथमिकता यही होती थी कि कुछ भी हो जाए, लेकिन उसका गेम नहीं रुकना चाहिए. हर जगह उसे पापा ट्रायल के लिए लेकर गए. उसे दिल्ली अकेले भेजा गया. फैमिली ने हमेशा उसका साथ दिया और हर अच्छे-बुरे वक्त में उसे सपोर्ट किया.

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सवाल: नेशनल टीम में जाने और फेमस होने के बाद क्या आप ऋषभ में कोई बदलाव महसूस करती हैं?

जवाब: नेशनल टीम में आने के बाद या फेमस हो जाने के बाद आज तक ऋषभ पंत में कोई भी बदलाव नहीं आया है. वह अब भी वैसा ही है, जैसा पहले था. पुरानी जान-पहचान, रिश्तेदारों और दोस्तों से उसी तरह मिलता है, जैसे पहले मिलता था. लेकिन वक्त के साथ वह परिपक्व हुआ है और हम सबको उस पर गर्व है.

सवाल: ऋषभ पंत का कोई डर या सीक्रेट या कमजोरी, जिसे वह किसी को नहीं बताते हैं, लेकिन आप जानती हैं?

जवाब: ऋषभ हमेशा से ही बहुत ही स्ट्रॉन्ग है. वह किसी चीज से नहीं डरता है. विफलता से भी उसे डर नहीं लगता, बल्कि वक्त के साथ वह और ज्यादा समझदार और फोकस हो रहा है.
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सवाल: क्या आपकी फ्रेंड्स ऋषभ पंत से मिलने की रिक्वेस्ट करती हैं? ऐसे में ऋषभ का रिएक्शन कैसा होता है?

जवाब: मेरी फ्रेंड्स बचपन से हमारे साथ रही हैं. वह सब मेरी फैमिली का हिस्सा हैं और उन्होंने बचपन से ऋषभ को देखा है. वह सब जानती हैं कि ऋषभ नेशनल टीम में आने के बाद कितना बिजी रहता है, इसलिए इस तरह की कोई रिक्वेस्ट नहीं आती हैं. ऋषभ भी उन सभी को मेरी तरह ही ट्रीट करता है.

सवाल: क्रिकेट से ब्रेक के वक्त ऋषभ पंत क्या करना पसंद करते हैं?

जवाब: जब ऋषभ क्रिकेट नहीं खेल रहे होते तो परिवार के साथ ही वक्त बिताते हैं. परिवार के साथ ही घूमने चले जाते हैं या फिर वीडियो गेम खेलते हैं. वीडियो गेम उसका फेवरेट टाइम पास है.

सवाल: जब ऋषभ पंत रन नहीं बना पाते या आलोचनाओं का सामना कर रहे होते हैं, उस वक्त वह कैसे वापसी करते हैं? या कौन उनकी मदद करता है?

जवाब: ऋषभ पंत मेहनत करने में यकीन रखता है. वह खुद से ही बात करता है और बस मेहनत करता रहता है. वह फोकस करता है और खुद को सुधारने की कोशिश करता है. वक्त के साथ वह काफी ज्यादा परिपक्व हुआ है. वह हर तरह की स्थिति को हैंडल करना जानता है और हमेशा कुछ सीखने के लिए तैयार रहता है. उसके कोच हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहते हैं. वह अपने कोच की सलाह को बहुत ध्यान से सुनता है और सीखता है.

सवाल: ऋषभ पंत अपनी लाइफ में सबसे ज्यादा किसको मानते हैं? किसकी वजह से क्रिकेट में आए?

जवाब: ऋषभ अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा अपने परिवार को मानते हैं. उनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी अपना परिवार है. ऋषभ की क्रिकेट में आने की च्वाइस खुद की थी और यह हमारे पापा का सपना भी था. ऋषभ ने बहुत कम उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. वह वीकेंड में क्रिकेट कोचिंग के लिए रुड़की से दिल्ली जाते थे. सप्ताह के बाकी दिनों में वह स्कूल जाता था और हमारे स्कूल के मैदान में शाम को प्रैक्टिस भी करता था. एक छोटे बच्चे के लिए स्कूल, पढ़ाई, कोचिंग के लिए यात्रा करना वास्तव में एक व्यस्त कार्यक्रम था, लेकिन वह बहुत एक्टिव था और इसे करते हुए कभी नहीं थकता था.

Tags: Cricket news, Rishabh Pant





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