सौरव गांगुली और विराट कोहली का अपना-अपना सच घातक!

0
26

[ad_1]

तो आखिरकार सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को उन्हीं के अंदाज में जवाब देने वाला क्रिकेटर मिल ही गया. सिर्फ जवाब देने वाला ही नहीं बल्कि सार्वजनिक तौर पर ‘झूठा’ तक नहीं कहने से हिचकने वाला. टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज कप्तान और मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कभी ये सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कोई खिलाडी सरेआम उनकी इस तरह धज्जियां उडा सकता है.

विराट कोहली (Virat Kohli) ने अपने एक ब्यान से पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है. जिस लडाई को रोहित शर्मा बनाम विराट कोहली (Rohit vs Virat) के तौर पर देखा जा रहा था, वहां अचानक से गांगुली जैसे शख्स की एंट्री होती है और क्या किसी शानदार फिल्म की तरह कोहली ने बोर्ड अध्यक्ष को कटघरे में खडा कर दिया है.

गांगुली की हस्ती और उनकी साख को चुनौती

विराट कोहली की इस खुल्लमखुल्ला बगावत का साफ मतलब है कि उन्हें गांगुली की हस्ती और उनकी साख को चुनौती दी है. कोहली ने ये भी जतलाया है कि आखिरी उन्हें कप्तानी से हटाने वाले दादा ही रहें हैं. अब गेंद तो गांगुली के पाले में है. जवाब उन्हें देना होगा.

इसे भी देखें, प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट का छलका दर्द- ‘मैं वनडे का कप्तान बने रहना चाहता था लेकिन…’

ना गांगुली के खिलाफ और ना ही विराट का समर्थन

इससे पहले कि आप ये सोचें कि मैं सौरव गांगुली के खिलाफ हूं या फिर विराट का पक्ष ले रहां हू तो एक बात साफ साफ कर दूं. मेरे निजी रिश्ते विराट से भी काफी अच्छे हैं और गांगुली से भी शानदार रहे हैं. मैं दोनों का प्रशंसक रहा हूं और इस बात से कहने में हिचकूंगा भी नहीं कि दादा ने अपने दौर में मेरे जैसै कई युवा पत्रकारों की मदद भी की है और हौसलाअफजाई भी. जिंदगी भर उस बात के लिए उनका शुक्रगुजार रहूंगा. ठीक उसी तरह से एक मैंने कोहली को अंडर 19 के दौर से देखा है और उनका पहला टीवी इंटरव्यू भी किया है लेकिन, आज ना सिर्फ एक पत्रकार बल्कि एक फैन के तौर पर भी दोनों के रवैये से काफी मायूस हूं.

दिग्गजों के बचकाने रवैये से उडा भारत का मजाक

इन दोनों दिग्गजों के चलते आज भारतीय क्रिकेट को पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदगी झेलना पड रही है. अरे, ऐसा किस्सा तो पाकिस्तानी क्रिकेट में होता था जहां पूर्व खिलाडी अपने ही मुल्क के मौजूदा खिलाडियों को अपने ब्यानों के जरिये हमला करते थे और याद है ना कैसे हमलोग उन पर हंसते थे. उनके बचकाने रवैये का मजाक उडाते थे. आज भारतीय क्रिकेट पर ना सिर्फ पाकिस्तानी बल्कि पूरी दुनिया हंस रही होगी.

इसे भी देखें, विराट कोहली ने सौरव गांगुली के दावे पर उठाया सवाल, बोले-मुझे कभी कप्तान बने रहने के लिए नहीं कहा

डेढ दशक बाद गांगुली फिर वही अध्याय देख रहे हैं..गलती पूरे मामले में ना सिर्फ कोहली की बल्कि गांगुली और चयनसिमित की भी रही है. पहले बात कोहली की. कोहली ने जब टी20 की कप्तानी छोडी तो उन्हें बिल्कुल ये कहने का हक नहीं था कि वो 2023 तक वन-डे क्रिकेट की कप्तानी भी करेंगे और टेस्ट की कप्तानी तो करेंगे ही. ऐसा क्यों? भारतीय क्रिकेट में कप्तान चाहे कितना भी बडा बल्लेबाज या फिर सुपर ब्रांड क्यों ना रहा हो वो खुद को कैसे बोर्ड या फिर चयनसमिति से ऊपर मान सकता है? कोहली ने ये भूल की और बीसीसीआई और गांगुली ने उन्हें पिछले 3 महीने में लगातार एहसास कराया.

दरअसल, मैं पहले भी इन कॉलम में लिख चुका हूं कि भले ही कोहली ने खुद की मर्जी से टी20 कप्तानी छोडने का संदेश देना चाहा हो लेकिन हकीकत इससे काफी दूर थी. कोहली ने चयनकर्ताओं और बोर्ड को ये सरेआम चुनौती दी कि अगर दम है तो मुझे वनडे कप्तानी से हटाओ, मैं तो खुद से नहीं छोडने वाला. लेकिन, कोहली भूल गए कि उनका बल्ला पिछले 2 सालों में विराट बोल नहीं बोल पाया है और बीसीसीआई हमेशा स्टार खिलाडियों उनके घटते कद का एहसास उसी समय कराती है जब वो संघर्ष के दौर से गुजर रहें हों. गांगुली से भला बेहतर इस बात को कौन जानता है जो आज से 15 साल पहले एकदम ऐसे ही दौर से गुजरे थे.

कोहली ने गलत किया तो गांगुली भी वही करेंगे?

लेकिन, यही तो समस्या है. कोहली ने अगर गलती की तो गांगुली तो उनसे एक दम और आगे निकल गये. आप चाहे कोहली को कितना भी नापंसद करतें हों, ये कतई नहीं चाहेंगे कि उनसे कप्तानी छीनने का ऐसा तमाशा किया. कोहली पहले ऐसे भारतीय कप्तान है जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर माना कि सफेद गेंद की फॉर्मेट में वर्ल्ड कप नहीं जीतने के चलते उनकी कप्तानी गई. साथ ही कोहली ने ये भी कहा कि रोहित शर्मा कप्तान के तौर पर भारतीय क्रिकेट के भविष्य हैं.

याद करें वो दौर जब गागुंली को हटाकर राहुल द्रविड को कप्तानी दी गई थी. उस समय गांगुली ने क्या द्रविड की नियुक्ति में तारीफ के दो बोल बोले थे क्या? गांगुली ने उस दौर में पूरे विवाद को तब के कोच ग्रेग चैपल बनाम दादा में तब्दील कर दिया था. देशी खिलाडी और विदेशी कोच की लडाई में जीत तो आखिरकार भारतीय की ही होनी ती और ऐसा हुआ भी. क्या आपने कभी महेंद्र सिंह धोनी, अनिल कुंबले और द्रविड को चैपल के बारें में एक बार भी बुरा कहते सुना? जवाब है- नहीं. गांगुली ने सफाई से चैपल को उस दौर में भारतीय क्रिकेट का सबसे बडा विलेन तो साबित करने में कामयाबी हासिल कर ली लेकिन आज वक्त का पहिया ऐसे घूमा है कि कोहली ने उन्हें सबसे बडा राजनीतिज्ञ करार दे दिया है. अपरोक्ष रुप से ही सही.

सच क्या होता है.. सबका अपना-अपना वर्जन

उम्मीद है कि आने वाले समय में गांगुली इस मुद्दे पर सफाई दे और अपना रुख साफ करें. हो सकता है कि उनके तर्क अलग हो और उनके मुताबिक पिक्चर कुछ और हो. अनायास ही मन में जिंदगी ना मिलेगी दोबारा फिल्म में नसीरुद्दीन शाह का वो डॉयलॉग याद आ जाता है जहां पर वो फरहान अख्तर को कहते हैं- सच क्या होता है.. सबका अपना अपना वर्जन होता है. बेहद मुमकिन है कि गांगुली का सच कोहली के सच से अलग होगा लेकिन, सबसे बडा सच तो यही है कि इस पूरे विवाद ने भारतीय क्रिकेट की छवि को जबरदस्त धक्का पहुंचाया है. इससे आसानी से बचा जा सकता था.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

ब्लॉगर के बारे में

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

और भी पढ़ें



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here