टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से पहली गेंद खेलने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज को जब मांगनी पड़ी भीख

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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) ने 1932 में लार्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट खेला था. भारत की तरफ से टेस्ट इतिहास में पहली गेंद का सामना जनार्दन ज्ञानोबा नवेले (Janardan Gyanoba Navle) ने किया. नवेले भारतीय क्रिकेट टीम के पहले टेस्ट विकेटकीपर थे. उन्होंने टीम इंडिया की तरफ से दो टेस्ट मैच खेले हैं. इस खिलाड़ी को अपने आखिरी दिन गुमनामी और भयंकर गरीबी में काटने पड़े. उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि भीख मांगने की नौबत आ गई.

जर्नादन ज्ञानोबा नवेले का करियर
जर्नादन ज्ञानोबा नवेले का जन्म 7 दिसंबर 1902 में महाराष्ट्र के फूलगांव में हुआ था. उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू कर लिया था. पांच फुट चार इंच का ये क्रिकेटर गजब का विकेटकीपर था. टेस्ट खेलने का मौका उन्हें पहली बार इंग्लैंड दौरे पर मिला. भारत के पहले टेस्ट मैच में उन्होंने पहली पारी में 12 और दूसरी पारी में 13 रन बनाए. इसके बाद वह टीम से बाहर हो गए. उन्होंने दूसरा और आखिरी टेस्ट मैच करीब डेढ़ साल बाद इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में खेला. दो टेस्ट मैचों में वो 42 रन बना सके. हालांकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ज्ञानोबा का रिकॉर्ड अच्छा था. उन्होंने 65 मैचों में 1976 रन बनाए, जिसमें नौ अर्धशतक थे. विकेटकीपर के रूप में उन्होंने 101 कैच लिये और 36 स्टंपिंग की.

जनार्दन पुणे के रहने वाले थे. एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. वह हाईस्कूल तक पढ़े थे. क्रिकेट से अलग होने के बाद उन्होंने पुणे में एक चीनी मिल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली. सुरक्षा गार्ड के रूप में ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे. पुणे में उनके पास दो कमरे का एक छोटा सा फ्लैट था. धीरे-धीरे उनका अपने समकालीन क्रिकेटरों से संपर्क टूटता चला गया.

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कुछ लोगों का कहना है कि आखिरी दिनों में उनके पास पैसे की घनघोर तंगी तो थी क्योंकि नौकरी से बहुत ज्यादा धन उन्होंने नहीं कमाया था. उस जमाने में भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) भी आज की तरह पुराने टेस्ट क्रिकेटरों की कोई आर्थिक मदद नहीं करता था. आखिरी दिनो में उन्हें मुंबई-पुणे हाई-वे पर भीख मांगते हुए देखा गया. इसी हालत में उनकी 7 सितंबर 1979 को पुणे में मौत हुई.

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