‘6 गेंद फेंककर ही थक जाता था, 3 साल पहले संन्यास लेने वाला था’, अश्विन का चौंकाने वाला खुलासा

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नई दिल्ली. भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने खुलासा किया है कि उन्होंने 2018 में इंग्लैंड सीरीज के बाद क्रिकेट से संन्यास लेने के बारे में गंभीरता से सोचा था. क्योंकि उन्हें लगता था कि टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें समर्थन नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 3 साल पहले एक समय ऐसा भी था, जब 6 गेंद फेंकने के बाद उनको थकान महसूस होने लगती थी. अश्विन ने बताया कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी के तकनीक में बदलाव किया, जिसके बाद उन्हें अच्छी सफलता मिलने लगी. अश्विन बीते कुछ सालों में सिर्फ गेंद से ही टीम इंडिया को टेस्ट नहीं जिता रहे, बल्कि कई मौकों पर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के दम पर टीम की हार टाली है.

आर अश्विन (R Ashwin) ने ईएसपीएनक्रिकइंफो को दिए इंटरव्यू में कहा, 2018 और 2020 के बीच, मैंने कई चीजों को देखते हुए खेल को छोड़ने पर संजीदगी से विचार करना शुरू कर दिया था. मैंने सोचा कि मैंने बहुत कोशिश की है, लेकिन नतीजे नहीं आ पा रहे थे. मैंने जितनी कोशिश करता, लगता कि चीजें उतनी ही मुझसे दूर जा रही हैं. तब मैं 6 गेंद फेंकने के बाद ही हांफ जाता था और मुझे सांस लेने के लिए रूकना पड़ता था. पूरे शरीर में मुझे दर्द होता था.

6 गेंद फेंककर भी थक जाता था: अश्विन
उन्होंने आगे बताया कि जब घुटने में दर्द होता था, तो मैं कम जंप करने लगा था और अगर कम जंप करता था, तो गेंद फेंकने के लिए सारा जोर मुझे पीठ और कंधे से लगाना पड़ता था. ऐसे में मैं अगली गेंद फेंकते वक्त कूल्हों का इस्तेमाल करने की कोशिश करने के लिए ज्यादा साइड-ऑन हो जाता था. जैसे-तैसे करके 6 गेंद फेंकता था और फिर थकान हावी होने लगती थी और मैं ब्रेक चाहता था.”

इस ऑफ स्पिनर ने उस दौर में जो महसूस किया, उसे बयां करते हुए कहा, “लोग मेरी चोट को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित नहीं रहते थे. तब मेरे पास ऐसे लोग नहीं थे, जिनसे मैं अपना दर्द बांट सकूं. मैंने महसूस किया कि बहुत से खिलाड़ियों को इस तरह की चोट के बाद टीम मैनेजमेंट या दूसरी जगहों से समर्थन मिलता है. लेकिन मैं नहीं जानता कि मेरे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ ? क्योंकि मैंने एक खिलाड़ी के नाते टीम के लिए कुछ कम योगदान नहीं दिया था. मैंने टीम के लिए काफी मैच जीते. लेकिन मुझे जरूरत थी तो कोई नहीं आया.”

‘मेरी किसी से मदद लेने की आदत नहीं है’
उन्होंने आगे कहा, “मुझे वैसे किसी की मदद लेने की आदत नहीं है. मुझे एक समय लगा कि अब बिना सहारे के मैं आगे नहीं बढ़ पाउंगा. आगे अश्विन ने कहा कि मुझे समझ आ गया था कि अब मुझे कुछ और ट्राई करने की जरूरत है.”

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‘पिता को मेरी व्हाइट बॉल क्रिकेट में वापसी की उम्मीद थी
अश्विन ने यह भी कहा कि उन्होंने 2018 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद भी संन्यास लेने पर गंभीरता से विचार किया था. ऑफ स्पिनर ने कहा, “2018 में इंग्लैंड सीरीज के बाद, साउथैम्पटन के बाद, एक ऐसा ही दौर था, उस सीरीज के बाद बाद में ऑस्ट्रेलिया (Australia) में, जहां एडिलेड टेस्ट के बाद मेरे पेट में चोट लग गई थी. उस समय भी संन्यास के बारे में विचार आने लगे थे. उस दौर में मैं जिस इकलौते व्यक्ति से बात कर रहा था, वो मेरी पत्नी थी. लेकिन पिता को पूरी उम्मीद थी कि मैं व्हाइट बॉल क्रिकेट में वापसी करूंगा. तब उन्होंने कहा था, मैं मरने से पहले तुम्हें व्हाइट-बॉल क्रिकेट में वापसी करते हुए देखूंगा.उनके लिए यह अधिक व्यक्तिगत था.

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अश्विन फिलहाल, टेस्ट सीरीज के लिए दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गए हैं. जहां 26 दिसंबर से सेंचुरियन में पहला टेस्ट खेला जाएगा.

Tags: Coach Ravi Shastri, Cricket news, India vs South Africa, R ashwin, Ravichandran ashwin



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